
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को बताया पुरानी कंपनी
नई दिल्ली जमाने की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे तो इंसान हो या संस्थान, हिकारत ही झेलता है। और यही हाल है संयुक्त राष्ट्र का। दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत आज इस हालत में पहुंच गई है कि इसकी उपयोगिता पर उठे सवालों की जड़ें लगातार गहरी हो रही हैं। विश्व जब आज बहुध्रुवीय अवस्था








