लखनऊ
समाजवादी पार्टी क्रास वोटिंग करने वाले अपने बागी विधायकों की सदस्यता खत्म करने की अब तक कोई याचिका नहीं दाखिल की है। दरअसल, राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग करने के आधार पर दल बदल विरोधी कानून के जरिए उनकी सदस्यता खत्म कराना संभव नहीं है। सपा को इसका अहसास पहले से ही था। इसलिए वह दूसरे विकल्प के रूप में लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में प्रचार करने बागियों की भूमिका व भागीदारी के पर्याप्त सुबूत तलाश रही थी। लेकिन ठोस सुबूत अभी तक नहीं मिल पाएं हैं। शायद यही वजह है अखिलेश के पीछे हटने की। यही कारण है कि सपा विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अभी तक इन बागी विधायकों के खिलाफ उनकी सदस्यता खत्म कराने संबंधी कोई याचिका दाखिल नहीं कर पाई है।
27 फरवरी को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव हुए सपा के 7 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में वोट किया था। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने बागी विधायकों की पार्टी में वापसी की किसी संभावना से इंकार करते हुए साफ कहा था कि इन पर कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। यही नहीं कुछ बागी विधायकों की वापसी के लिए पार्टी के नेताओं ने पैरवी की तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने साफ कहा कि किसी को वापस नहीं लिया जाएगा। लोकसभा चुनाव के कारण इन बागियों पर कार्रवाई का मुद्दा पीछे हो गया। बाद में लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार करने में इन बागियों की भूमिका तलाशने व उसके प्रमाण जुटाने की कोशिश हुई। इनकी सदस्यता खत्म कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाने की संभावना तलाशी गई। सूत्र बताते हैं कि एक विधायक को छोड़ कर पार्टी किसी के खिलाफ ऐसे सुबूत नहीं जुटा पाए जिससे दल विरोधी आचरण साबित हो सके। ऐसे में अब सपा का रूख अब इनके प्रति नर्म दिखता है। संभव है कि सियासी जरूरतों के चलते इनमें से कुछ की वापसी हो जाए।
अखिलेश यादव का कुछ विधायकों को लेकर रुख नरम
यूपी में 16 दिसंबर से शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है। चर्चा है कि महज क्रॉस वोटिंग ही सदस्यता खत्म करने का आधार नहीं हो सकता है। जब तक सदस्यों ने सदन के भीतर पार्टी व्हिप का उल्लंघन न किया हो। अखिलेश यादव की पार्टी सपा के पास कोई ठोस साबूत नहीं है। वहीं चर्चा यह भी है कि अखिलेश यादव का कुछ विधायकों को लेकर रुख नरम हुआ।
ये सात विधायकों ने की थी क्रास वोटिंग
सपा के सात विधायकों ने भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में क्रासवोटिंग की। इन विधायकों में ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय, गोसाईंगंज से विधायक अभय सिंह, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह, कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी, चायल से विधायक पूजा पाल, जलालाबाद से विधायक राकेश पांडेय और बिसौली से विधायक आशुतोष मौर्य शामिल हैं। इसके अलावा अमेठी से विधायक महाराजी देवी ने भी मतदान में गैर-हाजिर रहीं।
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