वाशिंगटन
डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका में जीत के बाद पाकिस्तान की सरकार असमंजस में है। पाकिस्तान ने इस मौके पर गैर-हस्तक्षेप की नीति की वकालत करते हुए अमेरिका के साथ संबंधों को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई, लेकिन इसके पीछे गहराई से छिपी चिंता भी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत के बाद पाकिस्तान के लिए यह सवाल खड़ा हो गया है कि वह कैसे अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाए रखेगा।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तान अमेरिका संग अपने पुराने संबंधों को गैर-हस्तक्षेप पर आधारित रखना चाहता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ट्रंप के नेतृत्व में पाकिस्तान-अमेरिका संबंध और व्यापक एवं मजबूत होंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान और चीन के संबंध किसी अन्य देश से प्रभावित नहीं होंगे और इन्हें हर स्थिति में स्थिर और रणनीतिक बताया।
ट्रंप की चीन विरोधी नीति पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण
पाकिस्तान और चीन के गहरे संबंध को देखते हुए, ट्रंप की वापसी से पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गई हैं। ट्रंप प्रशासन के पिछले कार्यकाल में अमेरिका-चीन संबंध तनावपूर्ण रहे थे और ट्रंप ने बार-बार चीन को रणनीतिक प्रतिस्पर्धी बताया। ऐसे में पाकिस्तान के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि वह अमेरिका और चीन के साथ संतुलन कैसे बनाए रखे।
इमरान खान की रिहाई को लेकर ट्रंप की भूमिका
इस बीच, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अमेरिकी विंग ने ट्रंप की जीत पर इमरान खान की रिहाई को लेकर भी उम्मीदें जताई हैं। पीटीआई के नेताओं का मानना है कि ट्रंप के प्रशासन से उन्हें इमरान खान की रिहाई में मदद मिल सकती है, जो इस समय जेल में हैं। हालांकि, मुमताज बलोच ने इन अटकलों को अफवाह करार दिया और कहा कि पाकिस्तान-अमेरिका संबंध आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित होंगे।
ट्रंप की जीत से पाकिस्तान-चीन संबंधों पर असर?
ट्रंप की चीन पर सख्त नीति और पाकिस्तान-चीन संबंधों की मजबूती को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का दूसरा कार्यकाल पाकिस्तान के लिए आसान नहीं होगा। अमेरिका की ओर से चीन पर दबाव बनाए रखने का असर पाकिस्तान पर भी पड़ेगा क्योंकि वह अपनी आर्थिक और सैन्य सहायता का एक बड़ा हिस्सा चीन से प्राप्त करता है।
ट्रंप की वापसी से पाकिस्तान के सामने कठिन कूटनीतिक चुनौतियां
विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप की अमेरिका में वापसी से पाकिस्तान की विदेश नीति में कई चुनौतियां खड़ी होंगी। पाकिस्तान को यह तय करना होगा कि वह चीन के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ कैसे घनिष्ठता स्थापित कर सकता है। वहीं, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टकराव के बीच पाकिस्तान के लिए किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करना जोखिम भरा हो सकता है।
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