वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का सर्वे रविवार को भी जारी रहेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम सुबह ही ज्ञानवापी पहुंच गई। बता दें कि इससे पहले शनिवार को भी ज्ञानवापी परिसर में वैज्ञानिक सर्वेक्षण का काम प्रात: 8 बजे शुरू हुआ। अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने बताया कि ए.एस.आई. टीम शनिवार सुबह ज्ञानवापी परिसर पहुंची और दूसरे दिन का सर्वे कार्य शुरू किया, जो साढ़े 5 घंटे चला। इस बीच मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता तौहीद खान ने बताया कि शनिवार को सर्वे कार्य के दौरान अधिवक्ता अखलाक और मुमताज सहित मुस्लिम पक्ष के 5 लोग ASI टीम के साथ शामिल हुए।
मस्जिद के केयर टेकर एजाज अहमद ने मस्जिद का ताला खोला। इसके बाद ए.एस.आई. की 61 लोगों की टीम मस्जिद में दाखिल हुई और वजूखाने को छोड़कर परिसर के दूसरे हिस्सों के सर्वे में जुट गई। इस दौरान ज्ञानवापी हॉल, तहखाना, पश्चिम दीवार, बाहरी दीवार के मैप तैयार किए गए। हिन्दू पक्ष की एक वादी सीता साहू ने बताया कि ज्ञानवापी परिसर के पश्चिमी दीवार पर आधी पशु और आधी देवता की मूर्ति दिखी। तहखाने में भी टूटी-फूटी मूर्तियां और खम्भे पड़े दिखे। इसे देखकर मुसलमान पक्ष चौंक गया।
‘जीपीआर' प्रौद्योगिकी का हो सकता है इस्तेमाल
ASI के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वैज्ञानिक सर्वेक्षण में इस्तेमाल की जा रही ‘जीपीआर' प्रौद्योगिकी बिना तोड़फोड के यह पता लगाने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि मस्जिद के नीचे कोई संरचना दबी हुई है या नहीं। जमीन के अंदर की तस्वीर लेने वाली रडार प्रौद्योगिकी ‘जीपीआर' की मदद से सर्वेक्षण किया जा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में फिर होगी सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट वाराणसी जिला अदालत के ASI सर्वेक्षण के आदेश को प्रभावित किए बिना पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को सील करने और गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर आठ अगस्त को सुनवाई करेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने 3 अगस्त के आदेश में वाराणसी जिला जज के आदेश को को सही करार दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। वाराणसी की अदालत में श्रृंगार गौरी के पूजा की नियमित पूजा की इजाजत दिए जाने की मांग को लेकर मुकदमा दाखिल करने वाली राखी सिंह व अन्य की तरफ से बुधवार को दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ सुनवाई करेगी। जनहित याचिका में कहा गया है कि श्रृंगार गौरी मामले में जब तक वाराणसी की अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए और ज्ञानवापी परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिन्हों को संरक्षित रखने का आदेश दिया जाए।
ओवैसी का रिएक्शन
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को कहा कि कौन जानता है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI ) की सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इसका क्या असर होगा। उन्होंने उम्मीद जताई की यह रिपोर्ट 'हजारों बाबरी मस्जिदों' के द्वार नहीं खोलेगी।ओवैसी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘उम्मीद है कि 23 दिसंबर और छह दिसंबर की घटनाएं दोहराई नहीं जाएंगी और पूजा स्थल अधिनियम की शुचिता के संबंध में अयोध्या मामले के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी का अनादर नहीं किया जाना चाहिए।'' उन्होंने आगे ट्वीट किया, ‘‘(यदि) एएसआई द्वारा ज्ञानवापी की सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है, तो कौन जानता है कि इसका असर क्या होगा। उम्मीद की जाती है कि 23 दिसंबर और छह दिसंबर की पुनरावृत्ति नहीं होगी। पूजा स्थल अधिनियम की शुचिता के संबंध में ‘अयोध्या मामले' के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का अनादर नहीं किया जाना चाहिए।
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