दमोह
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में युवाओं के लिए शुरू की मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में दमोह के तेंदूखेड़ा विकासखंड में की गई गड़बड़ी की जांच पूरी हो गई है। जिसमें मौके पर प्रतिष्ठान नहीं मिले। अब कलेक्टर को इस मामले में कार्रवाई करनी है। यह पूरा मामला करीब एक माह पहले सामने था। जिसकी सत्यता जानने अधिकारियों ने इस योजना की जांच कराई थी। जानकारी तो यह मिल रही है यह मामला केवल तेंदूखेड़ा ब्लाक का उठाया था, लेकिन कलेक्टर ने पुरे जिले की जांच कराई और तेंदूखेड़ा ब्लाक जैसे आलम पूरे जिले में देखने मिले हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पूर्व शुरू की थी। इस योजना का उद्देश्य राज्य में बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के लिए उन्हें स्किल ट्रेनिंग दिया जाना था। योजना के तहत युवाओं को अलग-अलग सेक्टर्स में ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें मानदेय यानी स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इस स्कीम में 800 कोर्स के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह योजना अगस्त 2023 में शुरू हुई थी जिसमें जमीनी स्तर पर ऐसा फर्जीबाड़ा हुआ की धरातल पर योजना थी ही नही केवल कागजों में इसका संचालन हो रहा था।
तेंदूखेड़ा ब्लाक में हुआ फर्जीवाड़ा
यह मामला दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक से उठाया गया था। जिन प्रतिष्ठानों का पंजीयन हुआ था, वह मौके पर नहीं थे, लेकिन प्रतिष्ठान के संचालक कागजों में यह दावा कर रहे थे कि प्रत्येक प्रतिष्ठानों पर 24, 24 बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे है। जिसके बाद दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने इसकी हकीकत जानने के लिए पहले तेंदूखेड़ा में सीखो कमाओ योजना के प्रतिष्ठानो की जांच कराई, लेकिन वहां प्रतिष्ठान नहीं मिले तो फिर पूरे जिले में पंजीकृत प्रतिष्ठानों की जांच कराई गई और अब जानकारी यह मिल रही है की पूरे जिले का आलम तेंदूखेड़ा ब्लाक जैसा समझ में आ रहा है।
तेंदूखेड़ा ब्लाक में 83 प्रतिष्ठान पंजीकृत है, जिनमें 40 ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जहां 19, 19 बेरोजगार युवा प्रशिक्षण ले रहे थे। इस मामले की जांच पड़ताल की गई तो पता चला की बेरोजगार युवाओं के लिए चलाई गई योजना जमीनी स्तर पर मजाक बन गई है और इस योजना में शासकीय कार्यलयों में पदस्थ कर्मचारी इसका लाभ ले रहे है। जिन बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण की बात कही जा रही है वह मौके पर कभी गये ही नहीं और न उनको इस तरह के प्रशिक्षण की कोई जानकारी है। तेंदूखेड़ा एसडीएम अभिनाश रावत ने दमोह कलेक्टर के निर्देश पर टीम बनाई और जांच कराई तो मामला पूरी तरह साफ हो गया
मामले में लगाई सत्यता की मुहर
जांच के लिए दमोह कलेक्टर ने अलग अलग विभाग के अधिकारियों को प्रतिष्ठानों की लिस्ट भेजी थी। तेंदूखेड़ा में एसडीएम, तहसीलदार, जनपद सीईओ नगर परिषद सीएमओ को प्रतिष्ठानो की जांच करनी थी। जांच हुई तो कई प्रतिष्ठान तो उस जगह पर मिले ही नहीं, जहां उनके संचालन का पता लिखा था। जो मिले वहां कोई युवा मौजूद नहीं थे जो प्रशिक्षण ले रहे है। प्रतिष्ठान वालों ने खुद भी कबूल किया है कि उन्होंने किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया। उनको तो यही जानकारी मिली थी कि पोर्टल पर प्रतिष्ठान का पंजीयन करो मेंबर की जगह 24 संख्या लिख दो हर माह शासन से राशि आएगी जो उन्होंने किया। पूरे मामले की जांच में क्या हुआ इसको लेकर जब तेंदूखेड़ा एसडीएम अभिनाश रावत ने बताया कि जांच में प्रतिष्ठान नहीं मिले। कुछ तो लापता है और जो मिले वहां पर प्रशिक्षण लेने वाले युवा नहीं मिले हैं। पूरा प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर के पास भेजा गया है आगे क्या होगा इसकी जानकारी कलेक्टर से ही मिल सकती है।
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