गांधी प्राणी उद्यान जल्द ही नए कलेवर में तैयार किया जाएगा। शिवपुरी लिंक रोड के पास इस चिड़ियाघर को शिफ्ट करने की प्रक्रिया की जा रही है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी होगी, तब तक वन्य प्राणियों के लिए यहां नए केज तैयार कराए जाएंगे। नगर निगम इसके लिए चिड़ियाघर का मास्टर प्लान तैयार करा रहा है। सेंट्रल जू अथारिटी (सीजेडए) की गाइडलाइन के अनुसार 10 साल के लिए तैयार होने वाले इस प्लान में अब चिंपाजी और व्हाइट लायन के लिए भी केज तैयार कराए जाएंगे।
वर्ष 1902 में खोले गए चिड़ियाघर में वर्तमान में 600 के आसपास वन्य प्राणी हैं। इनमें बाघ से लेकर बब्बर शेर और शुतुरमुर्ग और ईमू पक्षी तक शामिल है। प्रजनन के कारण इन वन्य प्राणियों का कुनबा भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब नए चिड़ियाघर और केजों की जरूरत महसूस हो रही है। हालांकि नए चिड़ियाघर की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और इसमें वन विभाग की ओर से मंजूरी मिलना शेष है। तब तक के लिए वर्तमान गांधी प्राणी उद्यान में ही कई बदलाव किए जाएंगे। इसमें नए सिरे से वन्य प्राणियों के लिए केज तैयार करने की योजना है। मास्टर प्लान बनाने वाले आर्किटेक्ट को नियुक्त करने के लिए नगर निगम ने हाल ही में टेंडर प्रक्रिया की है।
भारत में मिलने वाले बब्बर शेरों का रंग भूरा और पीला होता है, लेकिन व्हाइट यानी सफेद रंग के शेर मुख्य रूप से साउथ अफ्रीका में पाए जाते हैं। चिड़ियाघर में बब्बर शेरों का बड़ा कुनबा मौजूद है। पिछले दिनों एक नर शेर की बुढ़ापे के कारण मृत्यु भी हो गई थी। ऐसे में उसकी कमी को पूरा करने के लिए साउथ अफ्रीका से व्हाइट लायन लाने की कवायद की जाएगी।











