नई दिल्ली
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 53वीं जीएसटी काउंसिल मीटिंग के बाद कई अहम बातें कहीं। उन्होंने ज्यादा जोर जीएसटी के सरंचना को सरल करने पर दिया, जिसका व्यापारी वर्ग लंबे समय से मांग कर रहा है। उन्होंने कुछ चीजों को जीएसटी के दायरे से बाहर करके आम लोगों को राहत भी दी है। वित्त मंत्री ने कहा, "मैं जीएसटी असेसी (GST assessee) को भरोसा दिलाना चाहती हूं कि हमारा मकसद उनकी जिंदगी को आसान करना है। हम जीएसटी नियमों की जटिलता को कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मैं सीजीएसटी की ओर से इस तथ्य को रेखांकित करना चाहती हूं कि हम हर किसी को धड़ल्ले से नोटिस नहीं भेज रहे। सभी सक्रिय करदाताओं में से केवल 1.96% को ही केंद्रीय जीएसटी से कोई नोटिस भेजा गया है।"
प्लेटफॉर्म टिकट की ब्रिकी को GST से छूट
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे द्वारा प्लेटफॉर्म टिकटों की बिक्री, रिटायरिंग रूम की सुविधा, वेटिंग रूम जैसी सेवाओं को जीएसटी से छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि परिषद ने शैक्षणिक संस्थानों के बाहर छात्रावास आवास के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रति माह 20,000 रुपये तक की छूट दी है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों या कामकाजी वर्ग के लिए है और छूट का लाभ केवल तभी उठाया जा सकता है, जब आप कम से कम 90 दिनों तक ठहरे हों।
सरकारी मुकदमे कम करने के लिए भी पहल
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी मुकदमों को कम करने के लिए जीएसटी काउंसिल ने अलग-अलग अपीलीय प्राधिकरणों के समक्ष टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा अपील दायर करने के लिए एक मौद्रिक सीमा तय की है। उन्होंने बताया, 'जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए 20 लाख रुपये, हाई कोर्ट के लिए 1 करोड़ रुपये और सुप्रीम कोर्ट के लिए 2 करोड़ रुपये की मौद्रिक सीमा की सिफारिश की है। अगर मौद्रिक सीमा जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित सीमा से कम है तो टैक्स अथॉरिटी आमतौर पर अपील नहीं करेगा।'
सोलर कुकर, मिल्क कैन पर 12% टैक्स
जीएसटी काउंसिल ने दूध के कैन (Milk cans) पर 12 फीसदी के दर से टैक्स की सिफारिश की है। सभी कार्टन बॉक्स पर जीएसटी 18 से घटाकर 12 फीसदी निर्धारित किया है। सभी सोलर कुकर पर भी 12 प्रतिशत जीएसटी दर लागू होगी। साथ ही फायर स्प्रिंकलर सहित सभी प्रकार के स्प्रिंकलर पर भी 12 फीसदी जीएसटी की दर लागू होगी।
पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की तैयारी!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए किसी तरह के संशोधन की जरूरत भी नहीं। राज्यों को हमारे साथ मिलकर फ्यूल पर GST दर तय करने की जरूरत है। GST काउंसिल की अगली बैठक अब करीब दो महीने बाद अगस्त में होगी। उसी में पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के बारे में ज्यादा स्पष्टीकरण मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए एक मंत्रियों के समूह (GoM) का गठन हुआ है, जो अगस्त में GST काउंसिल को रिपोर्ट सौंपेगा।
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