प्रकाश तिवारी,पदमावती एक्सप्रेस,शहडोल
शहडोल,जिले के बुढार थाना क्षेत्र में इन दिनों जुए का ठीहा गुलजार हो रहा है, जो स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जुआ खेलने के लिए लोग जंगलों और उसके आस-पास के क्षेत्रों में जुटते हैं, जहाँ वे अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
युवा पीढ़ी पर असर
जुए की इस फड़ का आकर्षण खासकर युवाओं को अपनी ओर खींच रहा है। अच्छे और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवा भी कम समय में अधिक पैसे कमाने की चाहत में इस ओर खिंच रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
जुए के ठीहे की कमाई
इन जुए के ठीहों में कर्मचारी, व्यवसाई और युवा लाखों रुपये रोजाना गंवा रहे हैं, जबकि फड़ के संचालक इस रकम को नाल के रूप में निकालकर अपनी तिजोरियों को भर रहे हैं।
संचालक कौन हैं?
सूत्रों के अनुसार, इस जुए के फड़ के मुख्य संचालक अनिल, दीपू और मुन्नू हैं। ये लोग अपने आप को पुलिस से सेट बताते हैं और इस धंधे में बुढार के कपड़ा व्यापारी मुन्नू का भी सहयोग है। ये लोग सुरक्षित स्थानों में ले जाकर जुआ का संचालन करते हैं और जगह बदल-बदल कर अपने कार्य को अंजाम देते हैं।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
जंगलों में जगह बदल-बदल कर अनिल, दीपू और मुन्नू द्वारा जुआ खिलाया जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। स्थानीय पुलिस की चुप्पी और इस मामले में निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। पूरे शहर और गांव में इस जुए की चर्चा जोरों पर है, लेकिन पुलिस की कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है। इस वजह से पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जुए के इस अवैध धंधे को रोकने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सक्रिय होकर काम करना होगा ताकि युवा पीढ़ी और समाज पर पड़ रहे इसके नकारात्मक प्रभावों को रोका जा सके।











