तुर्किये और सीरिया में लोग सोमवार सुबह नींद से उठे भी नहीं थे कि प्राकृतिक आपदा ने उन्हें आ घेरा। रिक्टर पैमाने पर 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप से दोनों देश दहल उठे। यहीं नहीं, इसके कुछ ही घंटों भीतर 7.6 और 6.0 तीव्रता के दो और भूकंप भी आए। इस आपदा में 3700 से ज्यादा मौतें हो गईं जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। तुर्किये में 2,316 और सीरिया में 1999 से अधिक लोग मारे गए हैं। भूकंप से सैकड़ों इमारतें ढह गईं। लोग बचने के लिए बर्फीली सड़कों पर जमा हो गए।दक्षिणी तुर्किये और उत्तरी सीरिया में सबसे ज्यादा तबाही हुई। राहत और बचाव कार्य जारी हैं। हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है क्योंकि बचावकर्मी अभी प्रभावित इलाकों में मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। काफी लोग अभी भी मलबे में दबे हैं। यहां ये भी बता दें कि इससे पहले तुर्किये में वर्ष 1939 में 7.8 की तीव्रता वाला भूकंप आया था, जिसमें 32 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे।

सुबह आए भूंकप का मुख्य केंद्र तुर्किये के गजियांटेप प्रांत में नूरदगी से 23 किलोमीटर दूर पूर्व में रहा। इस भयानक प्राकृतिक आपदा आने के बाद तुर्की में 7 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। तुर्की की अनादोलु समाचार एजेंसी ने राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के हवाले से बताया कि तुर्की और विदेशी अभ्यावेदनों में 12 फरवरी की सूर्यास्त तक देश का झंडा आधा झुका रहेगा।











