रांची
मामला है 2010 के दौरान हुए सीरियल क्राइम का। डॉ. प्रभात हत्याकांड और अन्य सीरियल क्राइम को लेकर पंकज दूबे, रंजन भट्टाचार्य और अन्य आरोपियों को जमशेदपुर पुलिस ने पकड़ा था। कई बार फिल्मों में यह डॉयलॉग सुनने को मिलता है कि उसे धरती निगल गई या आकाश… ढूंढ निकालो कहीं से भी। कुछ इसी तरह के दो मामले जमशेदपुर के हैं। 13 साल पहले जमशेदपुर से लापता दो लोगों का आज तक कुछ पता नहीं चल पाया। इनमें से तो एक की मौत की जांच सीबीआई कर रही है, लेकिन अब तक उसके हाथ खाली हैं। मामला है 2010 के दौरान हुए सीरियल क्राइम का। डॉ. प्रभात हत्याकांड और अन्य सीरियल क्राइम को लेकर पंकज दूबे, रंजन भट्टाचार्य और अन्य आरोपियों को जमशेदपुर पुलिस ने पकड़ा था। पंकज दूबे और अन्य साथियों को तो 26 जनवरी 2010 को मीडिया के सामने पेश किया गया। लेकिन शूटर जावेद और रंजन भट्टाचार्य का अता-पता नहीं चला। रंजन का सामने लाने के लिए उसके परिवार के लोग सीबीआई के पास भी गए, पर कोई फायदा नहीं हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट में बताया कि गवाहों के मुकरने की वजह से रंजन का कुछ भी पता लगाना संभव नहीं है।
सीरियल क्राइम के थे आरोपी
वर्ष 2010 में 25 जनवरी से दोनों लापता हो गए थे। जावेद के परिवार के लोग पुलिस के खिलाफ नहीं गए, लेकिन रंजन भट्टाचार्य के परिजनों की मांग पर मामले की सीबीआई जांच शुरू हुई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि डॉ. प्रभात हत्याकांड में संलिप्तता के आरोप को लेकर 25 जनवरी को पुलिस बारीडीह विजया गार्डेन स्थित आवास से रंजन भट्टाचार्य को उठाकर ले गई थी, जिसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। वहीं, डॉ. प्रभात हत्याकांड और अन्य सीरियल क्राइम को लेकर मुख्य आरोपी पंकज दूबे समेत अन्य आरोपियों को 26 जनवरी 2010 को मीडिया के सामने पुलिस वे पेश किया गया था। उसमें रंजन भट्टाचार्य और जावेद नहीं थे। पुलिस ने तब उन दोनों को फरार बताया था। जबकि परिजनों ने पुलिस पर दोनों को उठाने का आरोप लगाया था। जावेद के परिजनों की मांग पर सीआईडी जांच से लेकर मानवाधिकार आयोग तक की जांच हुई नतीजा सिफर रहा।
आजतक नहीं मिला सुराग
जब दोनों लापता हुए थे तो परिवार के लोगों ने सीधे आरोप लगाया था कि उनके घर के बच्चों को पुलिस ने उठाया है। इसमें कुछ दिन तो जावेद के परिवार के लोग पुलिस के खिलाफ बोले लेकिन बाद में अचानक वे लोग खामोश हो गए। बाद में रंजन के परिवार वालों ने हाईकोर्ट के माध्यम से सीबीआई के लिए अर्जी थी जिसे स्वीकार किया गया लेकिन नजीता उसने भी शून्य ही दिया।
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