NHM की डायरेक्टर बनीं IAS सलोनी सिडाना, एमपी के सख्त अफसरों में होती है गिनती

भोपाल
 आपने अक्सर देखा होगा कि सरकारी कार्यालयों में सरकारी पैसे को पानी की तरह बहाया जाता है। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सरकारी पैसे का खूब दुरुपयोग करते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश में भी कुछ दिनों पहले तक ऐसा ही हो रहा था। चाय—पानी के खर्चे के लालची अफसर सरकारी पैसे को फोकट का समझकर उड़ा रहे थे। लेकिन जनाब! अब जमाना बदल गया है। यहां कोई आम अधिकारी नहीं, डॉ. सलोनी सिडाना मिशन डायरेक्टर बनकर आ गई हैं। इन्हें कोई मामूली आईएएस समझने की गलती मत कीजिएगा। अपनी सख्ती और सादगी के लिए मशहूर डॉ सिडाना ने सिर्फ 500 रुपए में शादी की थी।

एनएचएम एमपी में पदस्थ एक सूत्र ने हमें बताया कि डॉ. सलोनी सिडाना बेहद ईमानदार और सख्त अफसर हैं। उन्होंने एनएचएम में मची भर्राशाही को खत्म करने के लिए नकेल कसनी शुरू कर दी है। एनएचएम में पदस्थ फोकट का माल लूटने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है। सूत्रों के अनुसार डॉ. सलोनी सिडाना ने अधिकारियों को साफ कह दिया है कि ऑफिस में किसी की मनमानी नहीं चलेगी।
अधिकारियों का उतर गया मुंह

सरकारी पैसे से बोतलबंद पानी खरीदकर ऑफिस में पानी पीने वाले और कई बोतलें घर ले जाने वाले अधिकारियों का मुंह उतर गया है। अब उन्हें ऑफिस में लगे वाटर प्यूरीफायर का पानी पीना पड़ रहा है। इसलिए क्योंकि मिशन संचालक हर बिल को गौर से पढ़ रही हैं। एनएचएम के एक ईमानदार अधिकारी ने हमें बताया कि कई अधिकारी ऐसे थे जो कि आरओ का शुद्ध पानी पीने के बजाय बेफालतू में बोतल खरीदकर पानी पीते थे। इसका बिल एनएचएम के खाते में जुड़ता था और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाता था। लेकिन ईमानदार एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस फिजूलखर्ची पर रोक लगा दी है।
पानी का सालाना खर्चा था 8 लाख

एक सूत्र ने बताया कि एनएचएम ऑफिस में वाटर प्यूरीफायर लगे होने के बाद भी कुछ अधिकारी हर साल करीब 8 लाख रुपये का बोतल बंद पानी खरीदकर पी जाते थे। इस तरह हर महीने करीब 70 हजार रुपए का पानी एनएचएम द्वारा खरीदा जाता था। पानी पर पैसों की बर्बादी रुकने के बाद अब उन अधिकारियों को डर सता रहा है जो कि सरकारी पैसे से चाय, काफी, नाश्ता करते हैं। अब एमडी डॉ. सलोनी सिडाना इस फिजूलखर्ची पर भी रोक लगाने का मन बना सकती हैं। इस पहल से सरकार के लाखों रुपये बच सकते हैं।

वाटर प्यूरीफायर हैं तो बॉटल क्यों?

एक सूत्र ने बताया कि एनएचएम में अधिकारियों और कर्मचारियों को शुद्ध पानी उपलब्ध हो सके इसके लिए ऑफिस में विश्वस्तरीय वाटर प्यूरीफायर आरओ लगे हैं। लेकिन कुछ अधिकारी और कर्मचारी सरकारी पैसे से बोतल खरीदकर पानी पीते थे। कई अधिकारी 5-5 बोतल की पेटी अपने सरकारी गाड़ियों में घर ले जाते थे। लेकिन अब केवल हाई लेवल मीटिंग में ही बोतलबंद पानी का उपयोग हो रहा है।

प्लास्टिक बॉटल खतरनाक होती हैं

डॉ. सलोनी सिडाना खुद डॉक्टर रही हैं। वे हेल्थ के मुद्दे को बहुत अच्छे से समझती हैं। एक रिसर्च के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने की संभावना बढ़ सकती है। हृदयरोग और डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। प्लास्टिक में रखी गर्म चीज खाने या पीने से कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। प्लास्टिक की बोतल में मौजूद रसायन बीपीए और फ़ेथलेट्स प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। ये पानी हार्मोन असंतुलन का कारण बनता है। माइक्रोप्लास्टिक से दूषित पानी कोशिकाओं में सूजन और क्षति का कारण बनता है।


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