झारखण्ड-सोरेन कैबिनेट का पांच दिसंबर को विस्तार, 11 मंत्री लेंगे शपथ

रांची.

झारखंड में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद हेमंत सोरेन ने सीएम पद की शपथ ले ली। उनके साथ किसी मंत्री ने शपथ नहीं ली। 9 दिसंबर से विधानसभा के विशेष सत्र की घोषणा भी हो गई है। पर, अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है। अकेले सीएम बजट के बाबत अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं।

मंत्रिमंडल का विस्तार कांग्रेस की वजह से लटका हुआ है। कांग्रेस ने अभी तक अपने कोटे के मंत्रियों के नाम फाइनल नहीं किए हैं। झारखंड में इंडिया ब्लाक के दूसरे पार्टनर आरजेडी ने अपने कोटे के एक मंत्री का नाम फाइनल कर दिया है। विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले हर हाल में मंत्रिमंडल का विस्तार आवश्यक है। कम से कम संसदीय कार्य मंत्री का नाम तो सरकार को तय ही करना होगा। सत्र के दौरान संसदीय कार्य मंत्री की जरूरत पड़ती है।

झारखंड में 11 मंत्री बनने हैं
झारखंड में 11 मंत्री बनने हैं। सूत्र बताते हैं कि चार विधायकों पर एक मंत्री का फॉर्मूला तय हुआ है। इंडिया ब्लॉक के चार पार्टनर हैं। इनमें जेएमएम के अलावा कांग्रेस, आरजेडी और सीपीआई (एमएल) शामिल हैं। सीपीआई (एमएल) के दो विधायक हैं, पर उसने मंत्री पद लेने से मना कर दिया है। ऐसे में जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी से ही मंत्री बनाए जाने हैं। तय फार्मूले के मुताबिक कांग्रेस से चार, आरजेडी से एक और जेएमएम से छह मंत्री बनेंगे। आरजेडी ने अपने मंत्री का नाम हेमंत सोरेन को बता दिया है। कांग्रेस अभी मंथन में लगी है।

कांग्रेस बुधवार तक दे सकती है सूची
कांग्रेस कोटे से मंत्री बनने के लिए कई विधायक बेताब हैं। ऐसे लोगों को पता है कि मंत्रियों के नाम शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। इसलिए सभी अपने-अपने स्तर से दिल्ली में जुगाड़ भिड़ा रहे हैं। सूचना है कि दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व ने इस बाबत बैठक की है। आज या कल तक सूची हेमंत सोरेन को सौंपी जा सकती है। सूची मिलते ही मंत्रियों को शपथ दिलाने की औपचारिकता पूरी की जाएगी। पांच या छह दिसंबर को मंत्रिमंडल के बाकी सदस्यों का शपथ ग्रहण हो सकता है।

रामेश्वर उरांव पर कांग्रेस उलझी
कांग्रेस की सबसे बड़ी दुविधा रामेश्वर उरांव को लेकर है। हेमंत सोरेन की पिछली सरकार में वे वित्त मंत्री थे। भारतीय पुलिस सेवा से राजनीति में आए रामेश्वर उरांव जानकार और अनुभवी आदमी हैं। उनकी कद का कोई नेता इंडिया ब्लॉक के पास नहीं है, जो वित्त की समझ रखता हो। सोमवार को उरांव ने सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात भी की थी। हालांकि इसे उनकी शिष्टाचार भेंट बताया गया।

हेमंत की सहमति जरूरी होगी
हेमंत सोरेन इस बार 34 सीटें जीत कर सशक्त स्थिति में हैं। वे कांग्रेस के दबाव में कांग्रेस की ओर से सुझाए नामों पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करेंगे। कांग्रेस जो नाम मंत्री पद के लिए देगी, उन पर हेमंत की रजामंदी आवश्यक होगी। वे देखना चाहेंगे कि कौन बेहतर परफॉर्म कर सकता है। ऐसे नाम न हों, जिन पर पिछले कार्यकाल में उन्हें परेशानी का सामना का सामना करना पड़ा। हालांकि इस बार उन्हें ऐसा कोई खतरा नहीं है। कांग्रेस को किनारे कर भी दें तो बहुमत के लिए हेमंत को 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। उनके पास अपने विधायक 34 हैं। आरजेडी के चार और सीपीआई (एमएल) के दो विधायकों का समर्थन है। इसलिए कांग्रेस हेमंत की मर्जी से चलने को मजबूर है।


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