हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या के दिन का बहुत अधिक महत्व होता है. यह दिन भगवान शिव और पितरों को समर्पित होता है. इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया जाता है. इस दिन पितरों का तर्पण करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे पितरों को मोक्ष मिलता है और वे अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं. सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन है. इस दिन शिव पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन किए गए दान और पूजा से पापों का नाश होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 30 दिसंबर 2024 को सुबह 04 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 31 दिसंबर 2024 को सुबह 03 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में अमावस्या 30 दिसंबर को मनाई जाएगी.
सोमवती अमावस्या पर न करें ये काम
सोमवती अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ, पिंडदान किया जाता है. इसीलिए इस दिन भूलकर भी पितरों को बुरा भला नहीं कहना चाहिए और उनका तर्पण करना भी नहीं भूलना चाहिए.
सोमवती अमावस्या के दिन कुत्ता, गाय और कौवे को कष्ट नहीं देना चाहिए. इस दिन इन जीवों को पितरों का अंश मानकर खाना खिलाया जाता है. इसीलिए इनको नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए.
अमावस्या के दिन पितर पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य और श्राद्ध का इंतजार करते हैं. इसीलिए इस दिन ये सब काम करना नहीं भूलना चाहिए. अगर इन कामों को करना भूल जाते हैं तो पितर नाराज होकर श्राप देते हैं.
सोमवती अमावस्या के दिन की गई पूजा-पाठ का शुभ फल मिले इसके लिए पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.नियम न मामने से पूजा का शुल फल प्राप्त नहीं होता है.
सोमवती अमावस्या के दिन तामसिक चीजों को हाथ नहीं लगाना चाहिए. मांस, मदिरा को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए, तभी इस दिन की गई पूजा का अच्छा फल मिलता है.
सोमवती अमावस्या के दिन घर की साफ-सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए. घर या आसपास गंदगी नहीं फैलानी चाहिए, तभी पूजा शुभ फलदायी होती है.
सोमवती अमावस्या के दिन किसी से भी अपशब्द नहीं कहने चाहिए और न ही लड़ाई-झगड़ा करना चाहिए.इस दिन किसी का भी दिल दुखाने से बचना चाहिए.
क्यों खास है सोमवती आमावस्या?
सोमवती अमावस्या का दिन शनि, कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए सबसे खास होता है. शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सोमवती अमावस्या के दिन सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करें. इस दिन दांपत्य जीवन के लिए दोनों पति पत्नी को एक साथ पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए. साथ ही ‘ॐ पितृभ्य: नम:’ मंत्र का जाप कम से कम 108 बार अवश्य करें. मान्यता है इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पति-पत्नी के बीच तालमेल बना रहता है.
Warning: Attempt to read property "display_name" on bool in /home/u300579020/domains/padmavatiexpress.com/public_html/wp-content/plugins/userswp/widgets/authorbox.php on line 147
Warning: Attempt to read property "ID" on bool in /home/u300579020/domains/padmavatiexpress.com/public_html/wp-content/plugins/userswp/widgets/authorbox.php on line 148
Warning: Attempt to read property "user_nicename" on bool in /home/u300579020/domains/padmavatiexpress.com/public_html/wp-content/plugins/userswp/widgets/authorbox.php on line 169
Warning: Attempt to read property "user_registered" on bool in /home/u300579020/domains/padmavatiexpress.com/public_html/wp-content/plugins/userswp/widgets/authorbox.php on line 170
Warning: Attempt to read property "user_url" on bool in /home/u300579020/domains/padmavatiexpress.com/public_html/wp-content/plugins/userswp/widgets/authorbox.php on line 171











