मुंबई
एक्टर चंकी पांडे ने हाल ही एक इंटरव्यू में अपने करियर के उस बुरे दौर के बारे में बात की, जब उनके पास काम नहीं था। फिल्मों के ऑफर खत्म हो चुके थे। तब मजबूरी में उन्हें बांग्लादेश का रुख करना पड़ा ताकि घर-परिवार का गुजारा कर सकें। चंकी पांडे ने यह भी बताया कि चूंकि वह बुरी तरह टूट चुके थे और काम नहीं था, इसलिए वह बेटी अनन्या या पत्नी भावना को सेट पर भी नहीं बुलाते थे।
चंकी पांडे और अनन्या ने यूट्यूब चैनल पर दिए इंटरव्यू में इस बारे में बात की। चंकी ने बताया कि कैसे बांग्लादेश जाकर उन्होंने 4-5 साल तक वहीं काम किया और उसे अपना दूसरा घर बना लिया।
चंकी पांडे ने बताया सेट पर अनन्या को क्यों नहीं बुलाते थे
चंकी पांडे ने बेटी अनन्या से बात करते हुए कहा, 'तुम कभी सेट पर क्यों नहीं आईं क्योंकि जब तुम्हारी मां और मेरी शादी हुई, मैं वक्त में था। मैं तभी बांग्लादेश से लौटा था और अपने लिए काम तलाश रहा था। मैं कभी तुम्हें या तुम्हारी मां को सेट पर बुलाने की बात में नहीं पड़ा, और तब से यह ऐसे ही चलता आया।'
बांग्लादेश चले गए, फिल्में कीं और हिट हो गए
मालूम हो कि 90 के दशक में चंकी पांडे को लीड हीरो के रोल मिलने बंद हो गए थे, और सिर्फ सपोर्टिंग किरदार ही ऑफर हो रहे थे। कोई काम नहीं मिल रहा था। चंकी पांडे का करियर एकदम गर्त में चला गया। इसलिए वह बांग्लादेश चले गए और वहां की फिल्मों में काम करने लगे। खुशकिस्मती से चंकी पांडे की बांग्लादेशी फिल्में चल गईं और एक्टर को 'बांग्लादेश का शाहरुख खान' भी कहा जाने लगा।
प्रॉपर्टी डीलर बने और इवेंट्स कंपनी भी खोली
चंकी पांडे ने उस दौर को अपने करियर का सबसे डरावना वक्त बताया। वह बोले, 'मैंने काम करना बंद नहीं किया। बल्कि वहां एक इवेंट्स कंपनी खोल ली और इवेंट्स करने लगा। मैं प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा और जमीन खरीदने-बेचने लगा। सोचो मैंने घर-घर जाकर काम किया। मैंने अपना ईगो अपने अंदर रखा और सोचा कि मुझे सर्वाइव करना है।'
मां-बाप को कुछ नहीं बताया, बोले- पत्नी को भी नहीं पता कि कितना है कितना नहीं
चंकी पांडे ने फिर कहा, 'मैं आर्थिक तौर पर बुरी तरह टूट गया था। काम नहीं था, पर मैं माता-पिता से पैसे नहीं लेना चाहता था। अगर आप एक लड़के हो और अपना करियर शुरू कर चुके हो, तो आप वापस जाकर मां-बाप से पैसे नहीं मांग सकते। मैंने उन्हें कभी पता चलने ही नहीं दिया कि क्या हो रहा था। ना ही पत्नी को पता चलने दिया कि मेरे पास कितना है और कितना नहीं है।'
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