ग्वालियर
नल जल योजना से जनता को पानी मिले न मिले ठेकेदार और अफसरों की चांदी होना तय है। इस योजना में अब नई गड़बड़ी सामने आई है। जिसमें माल का भुगतान तो हो गया, लेकिन माल विभाग ने लिया ही नहीं। यही नहीं बाद में इसी माल को खुर्द-बुर्द भी कर दिया गया। फर्जी सीपेट सर्टिफिकेट के मामले में फंसी मुरैना की दोनों फर्मों ने भी ऐसा ही किया है। मुख्य अभियंता कार्यालय ने जब जांच कराई तो इनकी साइट पर ही पाइप रखे मिले हैं। जिसके फोटो भी अफसरों को मिल चुके हैं। इसके बाद इस संबंध में सभी कार्यपालन यंत्रियों को पत्र भी जारी किया गया है। दरअसल मुरैना में मां हरसिद्धी कंस्ट्रक्शन कंपनी और मैसर्स मीरा धाकड़ फर्म ने फर्जी सीपेट रिपोर्ट लगाकर भुगतान प्राप्त किया था। इस मामले के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
इधर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता आरएलएस मौर्य ने इस प्रकार के फर्जीवाड़े की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। जिसने स्पाट से फोटो लेकर भेज दिए हैं। जिससे पता चला कि विभाग द्वारा भुगतान करने के बाद भी पाइप अब तक दोनों फर्मों की साइट पर ही रखे हुए हैं। विभाग ने जब पड़ताल की तो पता चला कि इस प्रकार की स्थिति केवल मुरैना ही नहीं बल्कि कई अन्य जिलों में भी है। जहां भुगतान करने के बाद भी सामान को ग्रामीण पीएचई के अफसरों ने अपनी कस्टडी में नहीं लिया है।
ये मिली शिकायतें
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय को शिकायत मिली है कि ठेकेदारों के द्वारा योजनाओं के तहत खरीदे गए पाइपों का 60 प्रतिशत भुगतान प्राप्त किया गया है। इसके बाद पाइप विभाग की संपत्ति हो जाती है, लेकिन ठेकेदार इन पाइपों को अपने पास ही रखते हैं। इसमें यह भी शामिल है कि भुगतान प्राप्त करने के बाद ठेकेदार इस सामग्री को वहां से खुर्द-बुर्द कर देते हैं। इसके बाद ही गोपनीय रूप से पड़ताल कराई गई थी कि कहां पर उपयंत्रियों के रिकार्ड में सामग्री नहीं है। पता चला कि इस प्रकार की स्थिति अंचल के कई जिलों में है।
यह है नियम: बताया जाता है कि नल जल योजना में जो भी सामान खरीदा जाता है, उसका 60 प्रतिशत भुगतान ग्रामीण पीएचई विभाग द्वारा किया जाता है। इसके बाद यह सामान विभाग को अपनी कस्टडी में ही रखना होता है। जबकि जांच में सामने आया कि ठेकेदारों ने विभाग से भुगतान ले लिया और पाइप व अन्य सामान भी अपने पास ही रखे रहे।
अब क्या: मुख्य अभियंता कार्यालय ने जिन ठेकेदारों के द्वारा पाइप खरीदने के बाद भुगतान प्राप्त कर लिया गया है, ऐसे सभी पाइपों की मात्रा योजनावार एमएएस अकाउंट में संबंधित उपयंत्री से मंगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस योजना में पाइप की खरीदी और कस्टडी से लेकर तमाम जानकारी भी कार्यालय में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
मुरैना की जिन फर्माें ने फर्जी सीपेट सर्टिफिकेट लगाए हैं, उन्हाेंने भुगतान ताे प्राप्त किया, लेकिन पाइप अब भी साइट पर ही रखे हुए हैं। इसी प्रकार की शिकायत अन्य जिलाें में भी मिली है। जब विभाग राशि का भुगतान कर चुका है ताे संपत्ति विभाग के पास हाेना चाहिए। इस मामले में हमने पूरी जानकारी सभी कार्यपालन यंत्रियाें से मंगाई है। इस प्रकार की गड़बड़ी में जाे भी दाेषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरएलएस मौर्य, मुख्य अभियंता लाेक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
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