मुंबई
पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान देने वाले महाराष्ट्र के सरला द्वीप के मठाधीश रामगिरी महाराज एक बार फिर सुर्खियों में हैं. पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले पर रामगिरी महाराज ने मांफी मांगने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह इस्लाम विरोधी नहीं है, लेकिन वह अपने बयान को लेकर माफी नहीं मांगेंगे.
मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामगिरी महाराज ने कहा, "मैं माफी नहीं मांगूंगा. इस मामले में कोर्ट जो भी फैसला देगा वह मुझे मान्य होगा. हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है और यह अधिकार संविधान ने दिया है. अगर मेरी टिप्पणियों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो यह उसका व्यक्तिगत मुद्दा है." उन्होंने कहा कि उनके बयान के बाद देश के बाहर से सोशल मीडिया यूजर्स देश में हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.
बता दें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामगिरी महाराज के साथ पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्रर सत्यपाल सिंह भी मौजूद थे. सत्यपाल सिंह ने कहा, "महंत रामगिरी माफी नहीं मांगेंगे, क्योंकि उन्होंने वही कहा जो इस्लामिक किताबों में लिखा हुआ है. इस्लाम के विद्वानों और मौलानाओं को सभी को बताना चाहिए कि क्या रामगिरी की टिप्पणियां तथ्यात्मक नहीं थीं?"
गौरतलब है कि पिछले दिनों रामगिरी महाराज पर नासिक जिले के सिन्नार तालुका स्थित के पंचाले गांव में पैगंबर मोहम्मद के ऊपर विवादित बयान देने का आरोप लगा था. सोशल मीडिया पर बयान वायरल होने के बाद छत्रपती संभाजीनगर के वैजापुर शहर में काफी तनाव बढ़ गया था. इसको लेकर विरोध प्रदर्शन भी बड़े पैमाने पर हुए थे और एफआईआर भी दर्ज हुई थी.
कौन हैं रामगिरी महाराज?
बीबीसी के अनुसार, रामगिरी महाराज का असली नाम सुरेश रामकृष्ण राणे है. वे जलगांव जिले में पैदा हुए और वहीं अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. 1988 में जब सुरेश राणे 9वीं कक्षा में थे, तब उन्होंने स्वाध्याय केंद्र में गीता और भावगीता के अध्यायों का अध्ययन करना शुरू किया. 10वीं कक्षा पास करने के बाद उनके भाई ने उन्हें आईटीआई करने के लिए अहमदनगर के केडगांव में भर्ती कराया.
हालांकि, उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे न बढ़ाते हुए आध्यात्मिक मार्ग चुना. 2009 में उन्होंने दीक्षा ली और गंगागीर महाराज के शिष्य नारायणगिरि महाराज के शिष्य बन गए. 2009 में नारायणगिरि महाराज की मृत्यु के बाद रामगिरी महाराज सरला द्वीप के सिंहासन के उत्तराधिकारी बने, लेकिन इस पर भी विवाद हुआ. कोर्ट के फैसले के बाद रामगिरी महाराज को उत्तराधिकारी घोषित किया गया.
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