तेहरान
अफगानिस्तान बीते कई दशकों से अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। कभी वहां आतंकवाद चरम पर होता है तो कभी अमेरिकी सेनाओं के ऑपरेशन चलते हैं। फिलहाल अफगानिस्तान में तालिबान ने कब्जा जमा रखा है और इसके चलते बड़े पैमाने पर लोग पलायन कर रहे हैं। लाखों अफगानी बीते सालों में ईरान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, पाकिस्तान समेत दुनिया भर के मुल्कों में पलायन कर चुके हैं। इन अफगानियों का एक ही मकसद है कि कहीं सुकून की जिंदगी मिले और दो वक्त की रोटी सुविधा के साथ मिल पाए। इसी के चलते तेजी से पलायन हो रहा है।
यह संख्या इतनी अधिक है कि अब ईरान जैसी इस्लामिक मुल्क भी परेशान हो गए हैं। हालात यह हैं कि ईरान ने अफगानिस्तान से लगती अपनी सीमा में दीवारें खड़ी करनी शुरू कर दी हैं। ईरान ने हाल ही में अफगानिस्तान से लगने वाली अपनी पूर्वी सीमा पर 10 किलोमीटर लंबी दीवार खड़ी की है। यह दीवार ऐसे इलाके में खड़ी की गई है, जहां से बड़ी संख्या में अफगानी ईरान के अंदर दाखिल हो रहे थे। ईरान की ISNA न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया, 'सीमा पर करीब 10 किलोमीटर लंबी दीवार बना दी गई है। 50 किलोमीटर दूरी तक और दीवार बनाने की तैयारी है।' यह जानकारी ईरानी सेना के जनरल नजर नेमाती ने दी है।
ईरान की अफगानिस्तान के साथ करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। इसके चलते बड़ी संख्या में अफगानी ईरान में ही दाखिल हो जाते हैं। ईरान में एंट्री करना आसान है और इसके लिए किसी वीजा आदि की भी जरूरत लोग नहीं समझते। ईरान का कहना है कि उसके सीमांत इलाकों में मूल लोगों के मुकाबले अफगानियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बीते 40 सालों में इलाके की डेमोग्राफी ही चेंज हो गई है, जो चिंता की बात है। खासतौर पर 2021 में अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान के नियंत्रण के बाद इन लोगों के पलायन की दर बढ़ गई है।
तुर्की भी खड़ा कर चुका है अफगानियों को रोकने के लिए दीवार
तेहरान की ओर से यह जानकारी नहीं दी गई है कि अब तक कितने अफगानी उसके यहां दाखिल हुए हैं। लेकिन ईरानी सांसद अबुल फजल तोराबी ने पिछले दिनों कहा था कि यह आंकड़ा 60 से 70 लाख के करीब हो सकता है। इसी को लेकर जनरल नेमाती कहते हैं कि हम अपनी सीमाओं के एंट्री और एग्जिट पर मजबूत सुरक्षा चाहते हैं। ऐसा करने से घुसपैठ को रोका जा सकेगा, जो लगातार बढ़ रही है। इससे पहले तुर्की ने भी 2021 में ईरान से लगती सीमा पर दीवार खड़ी की थी। इसका मकसद भी यही था कि अफगानिस्तान से आने वाले लोगों को रोका जा सके।
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