भारत में शास्त्रीय विवाह को विशेष महत्व दिया जाता है। अर्थात वर और कन्या के माता पिता की आज्ञा से अग्नि की साक्षी में चार फेरों के उपरान्त होने वाले पाणिग्रहण संस्कार को शास्त्रीय विवाह की संज्ञा प्राप्त है। ऐसा विवाह सुखद और दीर्घ दांपत्य का परिचायक होता है। इसके साथ यह भी आवश्यक है कि वर और कन्या की आयु विवाह योग्य हो। अर्थात बहुत ज्यादा न हो। लेकिन वर्तमान युग में बहुत सी बातें पीछे छूट रही हैं। शिक्षा और करियर के लिए युवा विवाह को पहली प्राथमिकता में नहीं रख पाते हैं जिसके कारण विवाह की आयु निकल जाती है। उसके बाद बहुत प्रयास करने पर ही इंगेजमेन्ट और विवाह हो पाता है। हालांकि कुछ लोग अकारण ही विवाह में देरी करते हैं। लेकिन इसके कारण व्यक्ति को परिवार के लिए समय बहुत कम मिल पाता है। इसलिए सामाजिक व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए विवाह जैसी संस्था को परिपक्व होना चाहिए।
उपरोक्त एक पक्ष है, दूसरा पक्ष यह भी है कि कुछ लोग समय से ही विवाह करना चाहते हैं लेकिन उनकी इंगेजमेंट नहीं हो पाती है। यदि किसी की हो भी गई तो विवाह के मुकाम पर पहुंचने से पहले ही टूट जाती है। इसके बहुत से सामाजिक कारण तो होते ही हैं साथ ही व्यक्ति की जन्म कुंडली के ग्रह और हाथों की रेखाओं में भी बहुत से दोष होने संभव है जिसके कारण इंगेजमेंट नहीं हो पाती है। सबसे प्रसिद्ध योग मांगलिक दोष है जो कि मंगल और दूसरे पाप ग्रहों का सप्तम भाव से संबंध बनाने पर बनता है। यदि इन दोषों और विवाह बाधक योगों की पहचान करके उनके उपाय कर लिए जाएं तो निश्चित तौर पर समय पर इंगेजमेंट हो सकती है।
ज्योतिषीय संदर्भ में विवाह
मुझे जो प्रश्न किए जाते हैं उनमें धन के संबंध में तो प्रश्न होते ही हैं लेकिन इसके अलावा यदि किसी समस्या को लेकर प्रश्नों की बहुतायत है तो वह सगाई और विवाह के बारे में हैं। आज मैं इसी विषय पर हस्तरेखाओं, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र अनुसार क्या कुछ संकेत मिलते हैं उनके बारे में डिटेल में बताऊंगा।
यहां मैं स्पष्ट कर दूँ कि विवाह के संबंध में दो बातें सामने आती है पहले तो यह कि इंगेजमेंट के लिए रिश्ते तो बराबर आ रहें हैं लेकिन दुर्भाग्य से इंगेजमेन्ट हो नहीं रही है। दूसरी बात यह है कि इंगेजमेंट के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं आ रहा है। प्रिय पाठकों को क्लीयर कर दूं कि यह दोनों बिलकुल अलग-अलग चीजें हैं और इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही हमें समस्या को समझना चाहिए। उपाय भी दोनों का अलग-अलग होता है। इसलिए मैं पहले इस संबंध में क्लीयर होता हूं इसके बाद ही किसी प्रकार के समाधान की बात होती है।
हस्तरेखाओं में सामाजिक विवाह के संबंध में मस्तिष्क रेखा से संकेत मिलते हैं। मस्तिष्क रेखा से उठने वाली रेखाएं विवाह की औसत आयु बताती है। लेकिन वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा इसके संकेत हमें बृहस्पति के पर्वत और हृदय रेखा से मिलते हैं।
विवाह किस दिशा में होगा और दाम्पत्य जीवन कैसा रहेगा इसके संकेत हमें कुंडली के सातवें भाव से मिलते हैं। इसके अलावा लड़की की कुंडली में बृहस्पति और पुरुष की कुंडली में शुक्र की स्थिति का अवलोकन भी किया जाना चाहिये।
वास्तु संबंधी दोष भी बाधा उत्पन्न करता है
वास्तु की नजर से देखा जाए तो घर के बहुत से स्थानों से हमें संकेत मिलते हैं कि समस्या कहाँ पर है। जैसे घर का मुख्य द्वार यदि गलत जगह पर है तो ऐसे घर में प्रवेश के साथ ही लोगों की मानसिकता बदल जाती है। इसलिए सर्वप्रथम यह देखना चाहिए कि घर का मुख्य द्वार बहुत खराब स्थान पर नहीं हो। क्योंकि यदि मुख्य द्वार किसी असुर के स्थान पर बना होगा तो आप घर में शुभ और मांगलिक काम होने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। यदि मुख्य द्वार वास्तुशास्त्रानुसार नहीं है और आप उसे बदल भी नहीं सकते हैं तो तुरंत उसके वैकल्पिक उपाय करने चाहिए।
क्या करें उपाय
हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि नए अवसरों को देने का काम अग्नि कोण करता है। यदि वह ठीक नहीं है तो सगाई वाले आयेंगे ही नहीं। विवाह होना तो दूर की बात है। यदि घर में पिछले 10-15 वर्षों से कोई मांगलिक कार्य नहीं हुआ है तो इसका मतलब है कि भूमि में कोई दोष है। इसे जागृत करने के लिए घर में कोई मांगलिक कार्य आयोजित करके भूमि को पुनः जागृत करना चाहिए।
यदि कुंडली में मंगल दोष है तो उसकी शान्ति करवानी चाहिए। मंगल के बीज मंत्रों के 10000 जाप, दशांश हवन, मंगल की पूजा और मंगल के दान का एक अनुष्ठान करनवाना चाहिए। इससे मंगल की शान्ति होती है और इंगेजमेन्ट होने की संभावना बढ़ जाती है।
बृहस्पति विवाह का कारक है। यदि कुंडली में बृहस्पति बलहीन और पापाक्रांत हो तो बृहस्पति के रत्न, सीलोन श्रीलंका के पुखराज का सोने में बनवा कर तर्जनी अंगुली में धारण करने से इंगेजमेंट की संभावना को बल मिलता है।
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