बिहार
बिहार के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जल उपचार संयंत्र (इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट-ईटीपी) लगाए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज से लेकर अनुमंडल अस्पतालों में ये संयंत्र लगेंगे ताकि अस्पतालों का गंदा, जहरीला पानी सीधे शहर के नालों में नहीं जाए। बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह निर्णय लिया है। निजी अस्पतालों में भी इसकी व्यवस्था के लिए जल्द प्रयास किए जाएंगे।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार उपचार के दौरान चिकित्सा या पारा मेडिकल स्टाफ वाशबेसिन का इस्तेमाल करते हैं। विशेषकर ऑपरेशन थियेटर में मरीजों के उपचार के बाद कैंची व उपचार में आने वाली अन्य सामग्री धोयी जाती है। मौजूदा व्यवस्था में चिकित्सकों या पारा मेडिकल स्टाफ की ओर से धोए गए चिकित्सकीय उपकरण का पानी सीधे नाले में जा रहा है। चूंकि कई मरीजों को संक्रामक बीमारी भी होती है, ऐसे में शहर के नालों में उस पानी के जाने से संक्रामक बीमारियों का फैलाव हो सकता है। इसलिए विभाग ने तय किया है कि स्वास्थ्य संस्थानों में ईटीपी लगाए जाएंगे।
बीएमएसआईसीएल की ओर से टेंडर जारी
मेडिकल कॉलेजों में ईटीपी लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जबकि राज्य में बन रहे 21 मॉडल सदर अस्पतालों में यह सुविधा निर्माण के दौरान ही उपलब्ध हो जाएगी। बाकी 15 सदर अस्पताल व अनुमंडल अस्पतालों में ईटीपी लगाए जाएंगे। बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) की ओर से टेंडर जारी कर दिया गया है। पहले चरण में किशनगंज, अरवल, जहानाबाद, गया, नवादा, जमुई, खगड़िया, लखीसराय व शेखपुरा सदर अस्पताल में ईटीपी लगाए जाएंगे। जबकि अनुमंडल अस्पतालों में फारबिसगंज, बनमनखी, धमदाहा, बारसोई, मनिहारी, उदाकिशुनगंज, बख्तियारपुर, निर्मली, दाउदनगर, टेकारी, शेरघाटी, रजौली, बलिया, मंझौल, तारापुर, नवगछिया व कहलगांव में ईटीपी लगाए जाएंगे। इसके अलावा डुमरांव, जगदीशपुर,मोहनिया, दानापुर, बाढ़, मसौढ़ी, बिक्रमगंज, डिहरी, हिलसा, राजगीर, पकड़ी दयाल, अरेराज, चकिया, बगहा, नरकटियागंज, हथुआ, सोनपुर, महाराजगंज, बेनीपुर, झंझारपुर, जयनगर, फुलपरास, रोसड़ा, पूसा, दलसिंहसराय, पटोरी, महुआ व पुपरी में भी ईटीपी लगाए जाएंगे। इन स्वास्थ्य संस्थानों में ईटीपी की क्षमता 5 से 25 किलोलीटर दैनिक क्षमता की होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पतालों से निकलने वाले दूषित पानी को नुकसानरहित बनाने के लिए ईटीपी लगाए जा रहे हैं। जिन स्वास्थ्य संस्थानों में ईटीपी लगाए जाने हैं, वहां छह माह में कार्य पूरा होगा।- संजय कुमार सिंह, सचिव, स्वास्थ्य विभाग सह कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति
क्या होता है ईटीपी
ईटीपी दूषित जल को शुद्ध करने की प्रक्रिया होती है। अस्पतालों में विशेषकर ओटी से निकलने वाला पानी इतना दूषित (संक्रामक) होता है कि अगर इस जल का उपयोग किया जाए तो कई बीमारियां घर कर जाएंगी। उसका प्रयोग किसी मानवीय कार्य के लिए नहीं किया जा सकता है। यहां तक कि अगर इस जल का उपयोग फसलों के लिए भी किया जाए तो उससे नुकसान पहुंचेगा। इसलिए विभाग ने स्वास्थ्य संस्थानों में ईटीपी लगाने का निर्णय लिया है।
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