यूक्रेन ने रूस पर ड्रोन से ताबड़तोड़ हमला किया

मॉस्को
 रूस और यूक्रेन की लड़ाई एक बार फिर काला सागर तक पहुंच गई। यूक्रेन ने आज तड़के रूस के कब्जे वाले क्रीमिया को रूसी मुख्य भूमि से जोड़ने वाले पुल पर ड्रोन से हमला किया है। इस दौरान एक बंदरगाह पर धमाकों की आवाज सुनी गई है।

रूस के अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट एक रूसी टैंकर पर यूक्रेनी ड्रोन से किया गया। नोवोरोसिस्क पोर्ट के काला सागर बंदरगाह में रूस की समुद्री बचाव सेवा ने कहा कि टैंकर की मदद के लिए टगबोट भेजे गए। वह भी क्षतिग्रस्त हो गए। इसकी पुष्टि रूस के मीडिया ने भी की है।

उल्लेखनीय है यूक्रेन अब आक्रामक मुद्रा में है। उसने कल रात भी नोवोरोसिस्क में रूस के नौसैनिक अड्डे पर ड्रोन से ताबड़तोड हमला किया था। इस हमले में रूस का एक युद्धपोत क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि रूस यह दावा करता है कि उसने यूक्रेन के 13 ड्रोन को मार गिराया है।

 

मानव अधिकार समूह का अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध, 'अत्याचारों के लिए सूडान के नेताओं पर लगाए कड़े प्रतिबंध'

काहिरा
एक प्रमुख मानवाधिकार समूह ने  अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से सूडान के अशांत दारफुर क्षेत्र में "अत्याचारों के लिए जिम्मेदार" लोगों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है। उत्तर-पूर्वी अफ्रीकी देश सूडान में अप्रैल में अराजकता फैल गई थी जब अब्देल फतह बुरहान के नेतृत्व वाली सेना और मोहम्मद हमदान डागालो के नेतृत्व वाली अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच महीनों चला तनाव खार्तूम की खुली लड़ाई में बदल गया।

अमेरिका इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालेगा। ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि अमेरिका को प्रतिबंध लगाने चाहिए जिससे, "यह सुनिश्चित किया जा सके कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंततः नागरिकों की रक्षा के लिए कार्य करे और अत्याचारों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहरा सके।"

न्यूयॉर्क में स्थित एचआरडब्ल्यू ने कहा कि उपग्रह फुटेज के विश्लेषण और साक्ष्यों के अनुसार केवल पश्चिम दारफुर में कम से कम सात गांव और कस्बे लगभग पूरी तरह से जल गए या नष्ट हो गए हैं। इनमें हबीला कनारी, मेजमेरे, मिस्टरी, मोले, मुर्नेई, गोकोर और सिरबा शामिल हैं। एचआरडब्ल्यू के कार्यकारी निदेशक तिराना हसन ने कहा, "पश्चिमी दारफुर में एक के बाद एक शहर जलकर खाक हो गए हैं जिससे हजारों नागरिक अपनी जान बचाकर भाग रहे हैं। इसे लेकर दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए।

 


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