नई दिल्ली
हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी की अब जेल में रात कटेगी। दिल्ली में गिरफ्तार करने के बाद मलिक को सेशन कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने मलिक को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मलिक से जुड़े मामले में पुलिस के अनुरोध को स्वीकार किया है। कोर्ट ने अब्दुल मलिक को 6 मार्च तक पुलिस हिरासत में रखने की अनुमति दे दी है। इस अवधि के बाद मामले की आगे की कार्यवाही तय की गई है। विदित हो कि आठ फरवरी को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा के मुख्य आरोपी को उत्तराखंड पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया।
उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता आईजी नीलेश भरणे ने बताया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने अब्दुल मलिक को दिल्ली से गिरफ्तार करने वाली उत्तराखंड पुलिस टीम को 50,000 रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की है।
हल्द्वानी हिंसा में शामिल दंगा में शामिल 70 लोगों से ज्यादा गिरफ्तार हो चुके हैं। आपको बता दें कि नगर निगम ने हलद्वानी हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक के खिलाफ 2.44 करोड़ रुपये का रिकवरी नोटिस जारी किया है। हल्द्वानी हिंसा में झड़प के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए पैसे जमा करने को कहा गया है। हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई और 250 पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे। पुलिस ने हल्द्वानी हिंसा में शामिल दंगाइयों के घरों की कुर्की भी की थी।
सर्विलांस सिस्टम रहा फेल, मुखबिर पास
पुलिस का सारा डिजिटल नेटवर्क सिस्टम भी अब्दुल मलिक को गिरफ्तार करने में फेल रहा। हिंसा वाले दिन ही पुलिस ने एक साइबर टीम को सर्विलांस के काम पर लगा दिया था। मलिक के फोन नंबर की सीडीआर खंगाली गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मलिक से जुड़े कुछ करीबियों और रिश्तेदारों के साथ-साथ उसके परिचितों के मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लगाए गए। मलिक के बेटे मोईद और उसकी पत्नी का भी फोन सर्विलांस पर था। इतनी निगरानी के बाद भी पुलिस का डिजिटल तंत्र फ्लॉप रहा। मलिक ने न तो अपने पुराने मोबाइल और उसमें पड़े सिम का इस्तेमाल किया और न ही नए फोन और सिम के इस्तेमाल की बात अभी तक सामने आई है। आखिर में पुलिस के काम आया तो केवल पुराना मुखबिर तंत्र।
परिचितों की गाड़ियों का किया इस्तेमाल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब्दुल मलिक गिरफ्तारी से बचने के लिए जिस-जिस राज्य और शहर में गया वहां के लिए उसने अलग-अलग गाड़ियों का सहारा लिया। दिल्ली से लेकर गुजरात, चंडीगढ़ और भोपाल तक अपने रिश्तेदारों, परिचितों, व्यापारिक दोस्तों और परिचितों की मदद ली।
पांच स्थानों पर रहा पुलिस का फोकस
हिंसा के बाद से ही अब्दुल मलिक पुलिस के गिरफ्त से बचता फिर रहा था। लुकआउट सर्कुलर और संपत्ति कुर्क की कार्रवाई के बाद भी जब गिरफ्तारी नहीं हो पाई तो एसएसपी ने मलिक और उसके बेटे की तलाश में दिल्ली-चंडीगढ़, मुंबई-गुजरात,भोपाल से अन्य शहरों में टीम लगा दी।
प्रॉपर्टी और ठेकेदारी का काम करता है मलिक
पुलिस के अनुसार हल्द्वानी हिंसा का आरोपी मलिक का कारोबार बहुत बड़ा है। वह प्रॉपर्टी की खरीद-फरो,त के साथ ही रेलवे समेत कई विभागों में ठेकेदारी का कारोबार करता है। उसका कारोबार उत्तराखंड से लेकर गुजरात तक कई राज्यों में फैला हुआ है। इसीलिए पुलिस को उसे पकड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
अलग-अलग भागे बाप-बेटे
पुलिस शुरुआत से ही अब्दुल मालिक के पीछे दौड़ रही थी। अंदेशा था कि उसका वांटेड बेटा भी साथ होगा। जब धीरे-धीरे मालिक और उसके बेटे की तलाश आगे बढ़ी तो पता चला कि दोनों साथ नहीं अलग-अलग भागे हैं। मालिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब वांटेड अब्दुल मोईद की तलाश में जुट गई है। वहीं कोतवाली पुलिस ने मालिक की पत्नी साफिया तलाश भी शुरू कर दी है।
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