वाशिंगटन
चीनी हैकरों ने अमेरिकी सुरक्षा से जुड़े नेटवर्क में एक बार फिर बड़ी सेंध लगाई है. हैकरों ने अमेरिकी विदेश विभाग के 10 ई-मेल अकाउंट्स से 60 हजार ई-मेल डेटा की चोरी कर ली है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी संसद के एक कर्मचारी ने बताया है कि इस साल माइक्रोसॉफ्ट के ईमेल प्लेटफॉर्म में सेंध लगाकर चीनी हैकरों ने अमेरिकी विदेश विभाग के खातों से हजारों ईमेल चुराने में कामयाब रहे.
विदेश विभाग के आईटी अधिकारियों के प्रेस ब्रीफिंग के अनुसार, विदेश विभाग के जिन अधिकारियों के खातों से छेड़छाड़ की गई है. उनमें से ज्यादातर अधिकारी इंडो-पैसिफिक कूटनीति पर काम कर रहे थे. इसके अलावा हैकर्स सभी ईमेल वाली एक सूची भी चुराने में कामयाब रहे.
आईटी टीम के कर्मचारी ने अमेरिकी सांसदों को यह बताया कि विदेश विभाग के 10 खातों से 60 हजार ईमेल चोरी हो गए है. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से नौ अधिकारी पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में काम कर रहे थे. अन्य एक अधिकारी यूरोप क्षेत्र पर काम कर रहा था.
अमेरिकी सुरक्षा में सेंध पहली बार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब चीनी हैकरों ने अमेरिकी सुरक्षा में सेंध लगाई है. इससे पहले जुलाई में भी अमेरिकी अधिकारियों और माइक्रोसॉफ्ट ने कहा था कि मई 2023 के बाद से चीनी हैकरों ने अमेरिकी वाणिज्य और विदेश विभागों सहित लगभग 25 ऑर्गेनाइजेशन के ईमेल को एक्सेस कर लिया था.
अमेरिका का आरोप है कि साइबर सुरक्षा के उल्लंघन के पीछे चीन का हाथ है. इस वजह से दोनों देशों के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण हैं. हालांकि, चीन इन आरोपों को सिरे से इनकार करता रहा है.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हैकरों ने एक माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर के डिवाइस से छेड़छाड़ की है, जिससे उन्हें विदेश विभाग के ई-मेल अकाउंट्स में सेंध लगाने का एक्सेस मिल गया. माइक्रोसॉफ्ट ने भी इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अमेरिकी विदेश विभाग और वाणिज्य विभाग के सीनियर अधिकारियों के ई-मेल की हैकिंग माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर के कॉर्पोरेट अकाउंट से छेड़छाड़ के कारण हुई है.
प्रेस ब्रीफिंग के बाद अमेरिकी सीनेट श्मिट ने ईमेल के माध्यम से अपने कर्मचारियों से कहा है कि हमें इस प्रकार के साइबर हमलों और घुसपैठ के खिलाफ अपनी सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है. हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के प्रवक्ता ने सीनेट ब्रीफिंग पर तत्काल टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. बार-बार ई-मेल हैकिंग से कंपनी को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.
क्या और कहां है इंडो-पैसिफिक?
इंडो-पैसिफिक रीजन में चार महाद्वीप आते हैं- एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका, दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी इसी रीजन में निवास करती है. वहीं, आर्थिक रूप से भी यह रीजन काफी संपन्न है. कुल ग्लोबल इकोनॉमिक आउटपुट में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी रीजन का है. इंडो-पैसिफिक रीजन में दक्षिण चीन सागर सहित हिंद महासागर और पश्चिमी और मध्य प्रशांत महासागर शामिल हैं.
अमेरिका, भारत और कई अन्य विश्व शक्तियां वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य पैंतरेबाजी को देखते हुए एक स्वतंत्र, खुले और संपन्न इंडो-पैसिफिक रीजन को सुनिश्चित करना चाहती हैं.
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